Monday, July 11, 2022

Why and How to Buy Life Insurance (जीवन बीमा क्यूं और कैसे खरीदें)

जीवन बीमा 
क्यूं और कैसे खरीदें !

Why and How to Buy Life Insurance (जीवन बीमा क्यूं और कैसे खरीदें)
credit: Pixabay


जीवन बीमा उस व्यक्ति के लिए नहीं है जो निश्चित रूप से यह जानता है कि
  • वह 20-25 वर्ष और इस दुनियां मे रहेगा
  • वह सदा स्वस्थ और कमाने योग्य रहेगा
  • उसके पास बच्चों की शिक्षा और विवाह के लिए पर्याप्त धन रहेगा
  • बुढापे मे अगली पीढी उसकी सब जरूरतों का ध्यान रखेगी
  • यदि वह ना रहे तो उसके रिश्तेदार उसके परिवार का उसके जैसा ही ध्यान रखेंगे 
यदि आप यह निश्चित रूप से जानते हैं तो ऐसा जानने वाले आप विश्व के पहले व्यक्ति हैं। आपको आगे पढने की आवश्यकता नहीं है। यदि नहीं जानते, तो आगे पढ़ें और इस अनिश्चितता से निपटने का उपाय जानें।

जीवन बीमा का उद्देश्य यह नहीं है कि आप अमीर हो जायें। इसका उद्देश्य यह है कि आप या आपका परिवार गरीब ना हो।

जीवन बीमा लंबी अवधि का महत्वपूर्ण निवेश है।

यह दो कारणों से लिया जाता है । पहला है, जब सब कुछ अच्छे से ना चले। हम सबकी जिम्मेवारी है कि जब तक हमारे बच्चों की शादी ना हो जाए या वे खुद कमाने लायक ना हो जाएं, उनका  ध्यान करें। सब कुछ अपनी इच्छा से नही होता। परिवार मे कमाने वाले व्यक्ति के साथ अचानक कोइ दुर्घटना होने से पूरा परिवार डांवाडोल हो सकता है। भरपूर जीवन बीमा ऐसी स्थिति मे परिवार की मदद कर सकता है। दुनियां मे हम सब वापसी की टिकट के साथ आए हैं पर जाने की तारीख मालूम नही है।

बीमा लेने का दूसरा कारण है उस समय के लिए तैयारी करना जब सब कुछ अच्छे से चल रहा हो।  यदि एक व्यक्ति स्वस्थ है और रिटायरमेंट के बाद लंबी आयु जी रहा है, तो भी पैसे के लिए दूसरों पर निर्भरता उसकी खुशी को कम कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम जब तक खुद कमा रहे हैं, जीवन की उस शाम को बेहतर बिताने के लिए बचत और निवेश करें। बुढ़ापे में मजबूरी में काम ना करना पड़े, लंबे समय का जीवन बीमा इसमें मदद कर सकता है।

यदि साठ की उम्र के बाद भी आपका स्वास्थ्य और आमदनी सब कुछ अच्छे हैं, तो भी आज बचाया हुआ पैसा आपकी खुसी को कम नही कर सकता है। इस पैसे से आप विदेश यात्रा कर सकते हैं, योग्य बहू और पोते को मंहगे गिफ्ट दे सकते हो, किसी सामाजिक संस्था मे दान दे सकते हो।

जीवन बीमा की आवश्यकता निम्न कारणों से बढ़ रही है:

एकल परिवार: पहले संयुक्त परिवार थे। एक वयक्ति के साथ दुर्घटना होने पर परिवार के अन्य सदस्य उसकी पत्नी और बच्चों की परवरिश कर लेते थे। आजकल एकल परिवार मे कमाने वाले के साथ यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो आमदनी का कोई जरिया नही रहता। जीवन बीमा का क्लेम ऐसे संकट में महत्वपूर्ण मदद कर सकता है।
यदि आपने सोने चांदी, प्रोपर्टी, शेयर आदि मे निवेश किया है तो एक लाख का सवा या डेढ लाख ही मिल सकता है। जीवन बीमा मे ही एक लाख का दस से पंद्रह लाख मिल सकता है।

मंहगाई: पहले बुढ़ापे में थोड़ा धन भी पर्याप्त था। अब महंगाई के कारण खर्च बढ़ रहा है। अब पहले से ज्यादा धन की जरूरत है जो जीवन बीमा की पॉलिसी के जरिए इकट्ठा किया जा सकता है।

कर्ज लेने की सोच: आजकल ज्यादातर लोग मकान, कार, शिक्षा आदि के लिए कर्ज लेते रहते हैं। यदि पूरा कर्ज चुकाने से पहले ही कमाने वाले व्यक्ति को कुछ हो जाए तो पूरा परिवार सड़क पर आ सकता है। जीवन बीमा का क्लेम परिवार को ऐसे संकट से बचा सकता है।

पॉलिसी में क्या-क्या देखें

प्रायः हम कार, मकान, दुकान का तो बीमा करवाते हैं परंतु सबसे महत्वपूर्ण जीवन बीमा को भूल जाते हैं। मूलत: हर व्यक्ति को निम्न प्रकार का बीमा चाहिए।

पूरा रिस्क कवर: रिस्क कवर इतना होना चाहिए कि उसका क्लेम से परिवार का पहले जैसा स्टैंडर्ड बना रहे।

पर्याप्त बचत: आपकी बचत और निवेश आज इतना होना चाहिए कि भविष्य की जरूरतें पूरी होनी चाहिएं। 10-15 साल के बाद बच्चे को विदेश भेजना, बड़ी कार खरीदना, मकान की एक और मंजिल बनाना आदि की जरूरतों को पूरा करने का प्रावधान बीमा पॉलिसी में होना चाहिए।

पेंशन प्लान: जब आदमी कमाना बंद करता है तो उसे एक नियमित आय चाहिए। मेडिकल सुविधाओं के विकास के कारण औसत आयु बढ़ रही है, और इस बढ़ी हुई आयु को सम्मान पूर्वक जीने के लिए धन चाहिए। प्रायः बिजनेस वाले लोग इस प्लानिंग में चूक जाते हैं और उन्हें कोई पेंशन भी नहीं मिलती।

हेल्थ प्लान: 40 की आयु के बाद ही मेडिकल सुविधाओं की जरूरत पड़ने पड़ने लगती है और आयु के साथ बढ़ती ही जाती है। मेडिकल सुविधाएं देश में बढ़ रही हैं पर वे महंगी बहुत हैं। लाखों का खर्च सामान्य सी बात है। मेडिकल इंश्योरेंस, अचानक आने वाले खर्च से बचा सकता है। यह किसी जीवन बीमा प्लान के राइडर के रूप में या अलग से भी लिया जा सकता है। 

हेल्थ प्लान दो तरह के हो सकते हैं पहला वह जिसमें इलाज पर होने वाले वास्तविक खर्च की भरपाई की जाती है। दूसरे प्रकार के प्लान में कोई रोग होने पर अथवा अस्पताल में दाखिल होने पर एक निश्चित रकम का क्लेम दिया जाता है।

क्या आप अपना फंड खुद संभाल सकते हैं?

बहुत से लोगों को लगता है कि वे अपना फंड खुद संभाल सकते हैं और ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं। एक प्रमुख बाथ जानने वाली यह है कि जीवन बीमा सबसे ज्यादा रिटर्न कमाने के लिए नहीं होता है। यह एक पैकेज है जिसमें रिस्क कवर, उचित रिटर्न और आयकर का लाभ मिलता है। 

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या आपके पास अपना फंड संभालने के लिए पर्याप्त योग्यता और समय है। यदि ऐसा है तभी आप ज्यादा कमा सकते हैं। आपके किसी मित्र ने शेयर मार्केट में पिछले साल ज्यादा कमाया इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि आप भी वैसा ही कमा पाएंगे। बेहतर है कि अपना निवेश प्रोफेशनल फंड मैनेजर को सौंप दिया जाए।

सक्रिय और शांत निवेश 
(Active & Passive Investment)

निवेश दो प्रकार का होता है। एक वह जिसमें हम एक माह या एक वर्ष में ही बढ़िया रिटर्न की उम्मीद करते हैं।  हम हर रोज उसके भाव का उतार-चढ़ाव देखते हैं, दूसरों से सलाह लेते हैं कि भविष्य में बाजार कैसा रहेगा और उलटफेर करते रहते हैं। यह सक्रिय निवेश है। 

दूसरा व्यक्ति भी उसी शेयर या प्रॉपर्टी में निवेश करता है, परंतु वह शांत रहता है और लाभ के लिए उचित समय का इंतजार करता है। वह तभी बेचता है जब या तो लाभ मिलना तय है या पैसे की जरूरत है यह शांत निवेश है। 

सक्रिय निवेश पार्ट टाइम व्यापार जैसा है। आप निरंतर उसकी निगरानी करते हैं, ज्यादा लाभ कमा सकते हैं और नुकसान भी उठा सकते हैं। यह तय है कि आपको तनाव तो लेना ही पड़ेगा। इसकी शांत निवेश से कोई तुलना नहीं है, जहां आपको मन की शांति मिलती है। इसमें आपको मिलने वाली रिटर्न कुछ कम हो सकती है, पर नुकसान होने की गुंजाइश प्रायः नहीं होती। आपका सारा पैसा सक्रिय निवेश में नहीं लगना चाहिए।

हम अपने बच्चे को घर पर भी पढ़ा सकते हैं पर फिर भी स्कूल भेजते हैं। पैसे की भी एक पाठशाला है, उसे प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स के हाथ में सौंप देना। 

जीवन बीमा एक शांत निवेश है। यह लंबे समय के लिए है जिसमें पहले 5 साल से पहले लाभ नहीं मिल सकता, इसलिए हर रोज निगरानी रखने की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी। इसलिए इसकी तुलना सक्रिय निवेश से नहीं की जा सकती। इसमें आप सक्रिय निवेश से कमाए हुए लाभ का एक हिस्सा लगा कर मन की शांति पा सकते हैं।

जीवन बीमा के बारे में ग्राहक की सामान्य सोच 

मुझे जीवन बीमा नहीं चाहिए 

आप दुनिया में सारी चीजें तब खरीद सकते हैं जब आपको इनकी जरूरत है और आपके पास पैसा है। बीमा तब नहीं खरीदा जा सकता जब इसकी जरूरत है।

कार के बीमे की जरूरत तब नहीं है जब हम उसका प्रीमियम दे रहे हैं। इसकी जरूरत तब है जब कार का एक्सीडेंट हो गया और क्लेम लेना है। उस समय बीमा नहीं खरीदा जा सकता। इसी प्रकार से एक व्यक्ति को जीवन बीमा की जरूरत तब है जब वह गंभीर रोग के कारण अस्पताल में भर्ती है। उस समय बीमा नहीं मिल सकता। यदि गलत जानकारी देकर पॉलिसी ले भी ली तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा। इसलिए यदि आपको लगता है कि आपको भी में की आवश्यकता नहीं है तो यही समय है इसे खरीदने का। जब जरूरत होगी तब आप भी नहीं खरीद पाएंगे। कार की स्टेपनी तब चाहिए जब बाकी सारे पहिए ठीक हैं। हाईवे पर कार पंचर हो गई तब स्टेपनी नहीं मिल सकती क्योंकि तब आपको जरूरत है।

मेरे पास पहले से बीमा पॉलिसी है 

क्या आप जानते हैं कि आपकी सभी पॉलिसी में कितना रिस्क कवर है, वह कब मैच्योर होंगी और तब लगभग कितना धन आपको मिलेगा? शायद ही किसी ग्राहक को यह मालूम हो। यदि ऐसा है तो इसका अर्थ है कि यह पॉलिसी या आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा नहीं हैं और पर्याप्त भी नहीं हैं।

कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथा रहती है कि दूल्हा जब घोड़ी पर बैठता है तो कमर पर तलवार बांधता है। पुराने समय मैं वह हमले से बचाती थी। आजकल जो तलवार बांधी जाती है, उससे आप जरूरत पड़ने पर रसगुल्ला भी नहीं काट सकते हैं। ज्यादातर लोगों के पास जो बीमा है, वह उस दिखावटी तलवार जैसा ही है जो है, पर पर्याप्त नहीं है।

मुझे दुनियां की सबसे अनोखी पॉलिसी बताएं

क्या आपकी कार का बीमा सबसे अलग है? किसी भी कंपनी की पॉलिसी सबसे अलग नहीं हो सकती है। यदि होगी भी तो दूसरी कंपनियां तुरंत वैसा ही प्लान लॉन्च कर देंगी। अतः आपको एक अच्छा प्लान ही मिल सकता है, नायाब नहीं। आपके घर में जो टीवी और फ्रिज है वह और लोगों जैसे ही है। आपकी कार, चश्मा, कपड़े आदि सब कुछ दूसरों जैसा ही है। तो एक अच्छा प्लान देखें जो आपकी जरूरतों को पूरा करता हो, अनोखा नहीं। आप भी जो कुछ बेचते हैं उसके बारे में ऐसा नहीं कह सकते कि वह दुनिया से अलग है।

मेरे चार्टर्ड अकाउंटेंट को समझाएं

सीए टैक्स विशेषज्ञ होते हैं, बीमा विशेषज्ञ नहीं। वह आपको यह बता सकते हैं कि कितना प्रीमियम देने पर कितने की छूट मिलेगी। वे यह निर्णय नहीं ले सकते कि आप के ना रहने पर आपके परिवार को कितना धन मिले। वे यह भी नहीं बता सकते कि आपको बेटी की शादी कब व कितने बजट में करनी चाहिए, बेटे को कितनी महंगी शिक्षा दिलवानी चाहिए यह रिटायरमेंट पर आपके पास कितना पैसा होना चाहिए। 

क्या आपको लगता है कि आपके सीए के पास इतना समय है कि वह आपके लिए बीमा प्लान की तुलना करके देखें। ना उन्हें इसके लिए अलग से फीस मिलती है, ना ही उनके पास समय होता है। इसलिए बेहतर है कि बीमा एजेंट की मदद से आप स्वयं निर्णय करें, अपनी प्राथमिकताएं चुनें।

बीमा कैसे खरीदें

अपना विचार निर्धारित करें

प्रायः ग्राहक अपेक्षा करते हैं कि बीमा पॉलिसी ऐसी हो जिसमें अधिकतम रिटर्न, वह भी गारंटी के रूप में मिले, पूरा रिस्क कवर हो परंतु उसका चार्ज ना लगता हो और सारा पैसा शेयर मार्केट में लगे पर उसके डूबने का डर ना हो। क्या आपको लगता है कि यह सब एक साथ संभव है! आपने अभी जहां भी निवेश कर रखा है, वहां भी यह सब चीजें एक साथ नहीं मिल रही हैं। 

विश्व में किसी भी निवेश में आप को सबसे ज्यादा रिटर्न, पैसे की सुरक्षा और लिक्विडिटी एक साथ नहीं मिल सकती। शेयर मार्केट में रिटर्न ज्यादा हो सकती है पर सुरक्षा नहीं है, बैंक डिपॉजिट में सुरक्षा है, पर रिटर्न कम है,  प्रॉपर्टी में लिक्विडिटी नहीं है। विश्व में कुछ भी निशुल्क नहीं है। बीमा कंपनी भी जो कुछ देती है, उसका चार्ज लेती है। 

हमें भी अपना विचार बनाना चाहिए कि हमारे लिए क्या सबसे महत्वपूर्ण है- रिटर्न, सुरक्षा या लिक्विडिटी। आप जो कुछ भी चुनेंगे, उसे पाने के लिए कुछ तो छोड़ना ही पड़ेगा। यदि कोई ऐसी लड़की से शादी करना चाहे जिसकी आंखें श्रीदेवी जैसी, खूबसूरती दीपिका कैटरीना जैसी, फिगर बिपाशा जैसा हो तो वह सदा अविवाहित ही रहेगा।

अपना एजेंट कैसे चुनें

बीमा एक लंबे समय का संबंध है। आप किसी एजेंट से केवल इसीलिए पॉलिसी नहीं ले सकते क्योंकि वह आपका भतीजा है। हम अपनी सर्जरी के लिए किसी डॉक्टर को सिर्फ इसलिए नहीं सुन सकते क्योंकि वह हमारा संबंधी है। हम योग्यता के हिसाब से चुनाव करते हैं। क्या आपको आज से पहले किसी एजेंट नहीं बीमे के बारे में जानकारी देने वाली ऐसी बुकलेट दी! यदि नहीं तो जिस एजेंट ने आपको यह दी, उसका काम करने का तरीका बाकी लोगों से बेहतर है। वह एक प्रोफेशनल एजेंट है।

समय लें पर निर्णय भी लें

प्रायः हम एजेंट की बात सुनने के बाद कहते हैं मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए। यह आपका अधिकार भी है और कर्तव्य भी। परंतु क्या हम एजेंट के जाने के बाद इसके बारे में सोचते हैं! अक्सर दूसरी मीटिंग में बात वहीं से शुरू होती है जहां से पहले शुरू हुई थी, न कि जहां पहले समाप्त हुई थी। 

आप अपने निर्णय को अनिश्चितकाल के लिए डाल सकते हैं परंतु इससे क्या हासिल होगा! यदि आज आपने 50000 की पहली किस्त को 3 महीने के लिए टाल दिया तो 20 साल के बाद मिलने वाले लगभग 30 लाख की राशि भी 3 महीने बाद के लिए दूर सरक गई। उस समय वे 3 महीने आपको बहुत भारी लगेंगे।

निर्णय की चर्चा एजेंट से करें

यदि आपने अपने एजेंट से सवाल पूछे हैं और आप दोनों ने पॉलिसी समझने में समय लगाया है तो आप निर्णय अवश्य लें। यदि आपको कोई बात स्पष्ट नहीं है या आप प्लान से संतुष्ट नहीं हैं तो एजेंट से इसकी खुलकर चर्चा करें और प्लान को रिजेक्ट कर दें। पॉलिसी ना लेना भी एक निर्णय के तहत होना चाहिए, ना कि अनिर्णय के तहत। 

यदि पॉलिसी को रिजेक्ट करने का कोई प्रमुख कारण नहीं है तो जल्दी से प्लान लें और इस काम को समाप्त करें। बिना किसी कारण के निर्णय को लटकाए रखना आपके लिए और एजेंट के लिए तनाव बना रहेगा। सफल लोगों का समय ऐसे तनाव में नहीं जाना चाहिए। 

कुछ ग्राहक पहली मीटिंग के बाद एजेंट का फोन उठाना बंद कर देते हैं। क्या आपको लगता है कि जिस एजेंट ने बिना कुछ फीस चार्ज किए आपकी सुविधा अनुसार समय पर, आप के स्थान पर आकर आपकी जरूरत के बारे में समझाया, आपके सवालों के जवाब दिए, उसे आप से बात करने का भी अधिकार नहीं है? जो भी निर्णय हो, खुलकर एजेंट से बात करें और इस प्रकरण को समाप्त करें। 

यदि कोई कहता है कि वह 2 साल के बाद बीमा लेगा, तो इसका अर्थ है कि वह 2 साल तक के भविष्य को जानता है, तो वह आगे का भी जानता होगा। तब उसे यह बुकलेट पढ़नी ही नहीं चाहिए, जैसा कि पहले पेज पर लिखा है।

क्या आप सदा बीमा योग्य रहेंगे?

एक सामान्य धारणा यह है कि बीमा खरीदना मेरा ही निर्णय है। अनेक बार बीमा कंपनी इस बात का निर्णय करती है कि इसे बीमा दिया जाए या नहीं। यदि मेडिकल रिपोर्ट ठीक नहीं है तो बीमा कंपनी उसी पॉलिसी का ज्यादा प्रीमियम चार्ज करती है या उसे रिजेक्ट भी कर सकती है। कंपनी के इस निर्णय को बदला नहीं जा सकता। अतः जब तक स्वस्थ हैं, बीमा करवा ले। 22-23 वर्ष की आयु के बाद शरीर उतार पर ही होता है।

किस तरह का बीमा खरीदें ?

बाजार मैं अनेक प्रकार के प्लान उपलब्ध हैं जैसे एंडोमेंट, मनी बैक, चाइल्ड प्लान आदि कोई भी प्लान सर्वश्रेष्ठ नहीं है। केमिस्ट की दुकान पर कोई भी दवा सबके लिए सबसे अच्छी नहीं है। जो हमारी आवश्यकता के अनुसार है, वहीं सर्वश्रेष्ठ है आपको सबसे पहले ऐसा प्लान खरीदना चाहिए जो परिवार में कमाने वाले व्यक्ति को सबसे ज्यादा रिस्क कवर दे। घरेलू महिलाओं और बच्चों के लिए प्लान उसके बाद खरीदने चाहियें। 
बीमा कंपनी आपके पैसे का निवेश जैसे करती है उसके हिसाब से 2 तरह के प्लान हैं। पहली श्रेणी है बोनस वाले प्लान जिसमें पैसा बिल्कुल सुरक्षित स्थान पर निवेश होता है। इसमें आपको सामान्य रिटर्न ही मिलेगी। यदि आप किसी प्रकार का रिस्क कवर नहीं लेना चाहते तो ऐसे प्लान आपके लिए बेहतर हैं। दूसरे तरीके के प्लान है यूनिट लिंक(ULIP) इसमें बीमा कंपनी आप के आदेश अनुसार शेयर बाजार या सुरक्षित निवेश में पैसा लगाती है। यह प्लान ज्यादा पारदर्शी और लचीले हैं और इनमें रिटर्न भी ज्यादा आ सकती है, परंतु शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का डर है। 5 साल से पहले कोई भी प्लान बंद करने पर रिटर्न की अपेक्षा नहीं कर सकते।

कितने का कवर चाहिए ?

आपके पास वार्षिक आय का 12 गुना रिस्क कवर होना चाहिए। 6 लाख सालाना कमाने वाले को 72 लाख का बीमा चाहिए। व्यक्ति के ना रहने पर इतनी क्लीन राशि से परिवार को जो ब्याज मिलेगा, उससे वे पहले की तरह रह सकते हैं। यदि 10 लाख का कर्ज है तो वह राशि उसमें जोड़कर 82 लाख की बीमा लें। सारे सुरक्षित निवेश जिन से पैसा वसूला जा सकता है, इसमें से घटा दें। रहने का मकान, घर का फर्नीचर और सामान जो आप के बाद भी चाहिए, उसे नहीं घटाना है। उदाहरण के लिए यदि आपके पास बैंक डिपॉजिट, सोना, म्यूच्यूअल फंड आदि 20 लाख के हैं तो उसे घटाने के बाद आपको 62 लाख का बीमा चाहिए। 
यह वह क्लेम राशि है जो परिवार को पहले जैसी सुविधाएं दे सकती है।

कितने समय की पॉलिसी

बीमा पॉलिसी लंबे समय के लिए होनी चाहिए यदि आप की उम्र 40 साल है और आप 10 साल का ही प्लान लेते हैं तो यह 50 की उम्र में समाप्त हो जाएगा। उस समय नया प्लान लेना कठिन होगा क्योंकि उम्र के हिसाब से प्रीमियम बढ़ जाएगा और आप बीमा योग्य रहेंगे, यह भी तय नहीं है। लंबे समय के प्लान में आप बीमा कंपनी को उतने समय के लिए बांध लेते हो। 
25 साल की पॉलिसी का अर्थ यह नहीं है कि आपको इतने ही साल किस्त देनी है या इसे मैच्योरिटी से पहले बंद नहीं किया जा सकता। प्रीमियम कम बरस देने की सुविधा कुछ प्लान में रहती है और ज्यादा जरूरत की स्थिति में प्लान को पहले सरेंडर भी किया जा सकता है, हालांकि ऐसा करने से रिटर्न कुछ कम हो जाएगी। एक लंबे समय के प्लान को छोटा किया जा सकता है पर छोटे समय के प्लान की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती।

फॉर्म पर सही जानकारी

पॉलिसी के फॉर्म पर आपको अपनी आयु, सेहत, आदतें, व्यवसाय, परिवार के दूसरे सदस्यों और पुरानी बीमा पॉलिसियों से संबंधित सही जानकारी देनी चाहिए खांसी, जुखाम सामान्य बात है पर किसी बड़ी बीमारी और सर्जरी की बात को स्पष्ट लिखना चाहिए। यदि आपने किसी महत्वपूर्ण बात को सही जानकारी नहीं दी तो आप के बाद आपकी पत्नी को क्लेम लेने के लिए अदालत में लड़ना होगा।

बैंक से बीमा खरीदना

बैंक से बीमा खरीदना प्रायः सुखद अनुभव नहीं होता। आप एजेंट से आशा करते हैं कि वह 15-20 साल तक आपको सर्विस देगा। बैंक आपको पॉलिसी की सर्विस नहीं देता। कोई भी आपसे प्रीमियम लेने नहीं आएगा। 
यदि आप कभी बैंक में अपनी किसी पॉलिसी सरेंडर करने, नाम बदलवाने, पॉलिसी पर लोन लेने आदि के लिए जाएंगे तो वह आपको बीमा कंपनी के कार्यालय में ही भेजेंगे। बेहतर है आप एजेंट सही पॉलिसी खरीदें और घर बैठे सारी सुविधाएं पाएं।

टाइम वैल्यू ऑफ मनी

जितनी जल्दी निवेश, उतना जल्दी रिटर्न, इस कहावत को हम प्रायः भूल जाते हैं। एक उदाहरण देखें। एक व्यक्ति ने 30 से 40 की उम्र तक 50000 प्रति वर्ष निवेश किया। यदि ब्याज की दर 9% सालाना हो तो 60 की उम्र में रिटायरमेंट पर उसे 46,40,000 मिलेंगे।
दूसरे व्यक्ति ने देरी से शुरू किया और 40 से 60 साल की उम्र तक 50000 हर वर्ष दिया। उसी ब्याज दर से 60 की उम्र में उसे 27,90,000 मिलेगा। पहले व्यक्ति को आधा निवेश करने से भी बहुत ज्यादा राशि इसलिए मिलेगी क्योंकि उसने जल्दी शुरुआत की। यह निवेश में समय का महत्व है।

यदि आप इन बातों को ध्यान में रखकर अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करेंगे तो परिणाम बेहतर होंगे।

शुभ कामनाएं !


जीवन बीमे की आप की आवश्यकता(Adequate Life Insurance)

वार्षिक आय..................................................................
बीमे की जरूरत................................................ 12 गुना
जोड़ें कर्ज की देनदारी................................................... 
घटाएं सुरक्षित निवेश..................................................... 
बीमा चाहिए..................................................................



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